Amit mishra

अक्सर जो इंसान हमारे सबसे करीब होता है, हम उसकी अच्छाइयां नही देख पाते क्योंकि कोई भी वस्तु जब हमारे बेहद करीब होता है तो धुंधला ही नजर आता है।
:-अमित मिश्रा

Amit mishra

वक्त के एक करवट से हमने लोगो को यू बदलते देखा है, जैसे कि हवा के रुख बदलने पे रेत की दिशा बदलती है।

:-अमित मिश्रा

Amit mishra

इस दुनिया का क्या कहे जनाब हर बार हमने किरदार वही और चेहरे नए देखे है।

:-अमित मिश्रा

गुरु

#poem_openverse

ज्ञानचक्षु के धारा है गुरु,
स्वतः के प्रकाश से प्रकाशित तारा है गुरु।

जीवन के आधार है गुरु,
कठोरता से परिपूर्ण प्यार है गुरु।

जग के रचैता है गुरु,
इनके ही मार्गदर्शन से होता अच्छा मनुष्य बनने का कार्य शुरू।

स्वयं में ब्रह्मा,विष्णु,महेश है गुरु ,
मनुष्य के रचैता व विध्वंसकर्ता है गुरु।

अंधकार रूपी इस भवर के तारणकर्ता है गुरु,
अपने प्रकाश से उजाले की ओर ले जाने वाले कर्ता है गुरु।

गुरु से ही अर्थ है,
बिन गुरु ये जीवन व्यर्थ है।

:-अमित मिश्रा

कल हो ना हो

कल हो ना हो

जी लो इस पल को कल हो ना हो,

कल के भरोसे मत बैठो कल हो ना हो।

जीवन के हर जंग से आज लड़ो कल हो ना हो,
रिश्तों के हर रंग को आज भरो कल हो ना हो।

हर सपने को पूरा करो कल हो ना हो,
हर अपने को खुश रखो कल हो ना हो।

कल का सोच के आज मत बैठो कल हो ना हो,
आज करो सब काम अधूरे कल हो ना हो।

जीवन एक मायाजाल है ये माया कल हो ना हो,
सब अपने है लेकिन सपने क्या पता कल हो ना हो।

जी लो इस पल को कल हो ना हो,
कल के भरोसे मत बैठो कल हो ना हो।

:-अमित मिश्रा

आजाद है हम

‘आजाद है हम’

आजादी है हमें उन गोरों के गुलामी से,आजादी है हमें उन क्रूर शासकों के पैमानों से।

आजादी हैं हमें अपने विचारों से
मगर ये कैसी आजादी जिसमे होता भ्रष्टाचार है,अगर आजाद हैं हम तो होता कैसे बलात्कार है?

आजादी हैं हमें अपने बातों में,फिर लड़कियां क्यों डरती है अंधेरी रातों में?

आजादी है हमे मशहूर होने को लेकर
फिर कोई क्यों चला जाता है गरीबी के कारण इस दुनियां को छोड़कर।

आजादी है हमें दौलत-शौहरत कमाने में,फिर क्यों सिसकता है एक शहीद जवान का परिवार इस जमाने में।

निवेदन संग आवेदन है मेरा अपने देश के प्रतिनिधियों से,मुझे दिक्कत है आपलोग के इन राजनीतिक विधियों से।
कब-तक आप बस अपनी रोटी सकेंगे,जब कभी आप पे गुजरी तो अपने बनाये सिस्टम में खुदको नाचते देखेंगे।

हम आजाद है आजादी हमे सबसे न्यारी है,ये हमारा भारतदेश है जो प्राणों से अधिक हमें प्यारी है।

जिस दिन ऐसा आवेदन हर भारतवासी खुद से कर पाएंगे, सच केहता हूं उसी दिन अच्छे दिन आ जाएंगे।

:-अमित मिश्रा

अपने

‘अपने’

अपने वो लोग नही जिनसे बस हमारा खून का नाता हो,अपने तो वो होते है जिनसे हमारा दिल का नाता हो।

अपने वो लोग होते है जो सुख में ही नही दुख में भी हमे खुश कर देते है,कुछ तो जादू होता है उनमें ना जाने वो कैसे कर लेते है।

अपनो के बिना जीवन बेरंग है क्योंकि अपने हमारे एक अभिन्न अंग है।

अपनो के जीवन मे खुशियां बिछाना,किसी भी हाल में साथ देने में ना घबराना,
ना जाने कब इस दुनिया से नाता टूट जाये बस यही अपनों के यादों में है रह जाना।

ना जाने आजकल कैसी ये दौर चली है,
हर अपना अपनों का ही चढ़ाता बलि है।

कहने को तो सब अपने है लेकिन सच मे केवल सपने है।
इन सपनों पे ऐतबार क्या ,इनसे कोई व्यवहार क्या ,कब आप इनके लिए अयोग्य हो जाये इस बात से इंकार क्या?

बगैर अपनापन के ये दुनिया कितने दिन चल पाएगी,माँ धरती भी एक न एक दिन सहन नही कर पायेगी।

समय की पुकार है ,वक़्त की ललकार है
रिश्तों को अपनापन से सजाओ,अपनों को गले से लगाओ,कड़वी यादों को भूल जाओ,मिलजुलकर एक नया सृष्टि बनाओ।

:-अमित मिश्रा