हो सके तो माफ़ करना ए जिंदगी
हो सके तो माफ़ करना ए जिंदगी,तूने मुझे फरेब सिखाया नहीं इसलिए मैं आगे आ पाया नहीं,सबके मन को भा पाया नहीं…
रंजिश – ए – फरेब से वाकिफ हम भी थे,मगर कभी खुद का तो कभी औरों का सोच मैंने जताया नहीं…
कब किसने ,कितना और क्या समझा सब खबर है मुझे लेकिन समझ समझ की फेर में अपनों को भूल जाना तूने मुझे सिखाया नहीं।हो सके तो माफ़ करना ए जिंदगी…
रूठा तो मैं भी,टूटा भी मैं भी मगर खबर थी मुझे की मुझे मनाने वालों में कोई नहीं..इसलिए खुद को बार बार बताया चल कोई नहीं तू खुद उठ जा ,तू खुद झुक जा…
हो सके तो माफ़ करना ए जिंदगी,तूने मुझे फरेब सिखाया नहीं इसलिए मैं आगे आ पाया नहीं,सबके मन को भा पाया नहीं…
:- अमित मिश्रा





